
आओ डॉक्टर डॉक्टर खेलें
Abdel-oubaid
Description
हर कोई शहर में आकर काम करना चाहता है रहना चाहता है अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ना चाहता है हर कोई यह नहीं सोचता कि हर किसी के घर में कोई ना कोई बीमार क्यों है हर कोई यह नहीं सोचता कि जैसे घर में रहने का एक नियम है जैसे स्कूल का कॉलेज का एक नियम है या कुछ नियम है जैसे जब और बिजनेस के कुछ नियम है उसी तरीके से समाज में रहने के भी कुछ नियम होते हैं यह जो सड़के हैं जो गालियां हैं जो पानी है यह जो हवा है यह जो सरकारी इमारतें हैं यह जो सरकार है यह जो मेट्रोस है यह जो बुलेट ट्रेंस है यह जो ट्रेन है यह जो सरकारी बस हैं यह जो सरकारी इमारत है यह जो पहाड़ियां और भी इन सब पर हमारा संवैधानिक अधिकार है लेकिन लेकिन इतने सारे अधिकारों के साथ-साथ कुछ संवैधानिक व सामाजिक कर्तव्य भी हम बचपन में जो देखते हैं माता-पिता को करते हुए बोलते हुए स्कूल में अध्यापकों को समझ में बड़े लोगों को उसमें चाहे वह अच्छा है या बुरा है हमें लगता है वह सब कर रहे हैं तो हमें भी करना ही है उसमें कुछ लोग गिनती के होते हैं जो अच्छाइयों में और अच्छाइयां जोड़ लेते हैं लेकिन अधिकतर लोग बुराइयों में और बुराइयां जोड़ लेते हैं और अधिकारों के लिए सरकार का ग्रह बढ़ने को तैयार रहते हैं लेकिन कर्तव्य के लिए कमर दिखाकर भाग जाते हैं किसी भी इलेक्शंस में हजारों करोड रुपए खर्च करने की जरूरत ही नहीं है अगर हमारा नेता या होने वाला कॉरपोरेटर एमएलए एमपी उसे क्षेत्र में पूरी निष्ठा और त्याग के साथ में सामाजिक कार्य करें घर में माता-पिता को माता-पिता के अलावा अनुशासित गुरु होना होगा इसी तरीके से स्कूलों में अध्यापकों को अध्यापक के साथ-साथ पूर्णतः अनुशासित गुरु होने की आवश्यकता है जो जिस पेड़ पर होता है दुनिया के अंत तक वही होगा उसे स्वयं ईश्वर भी नहीं बदल सकता क्योंकि प्रभु सत्ता ने जितनी भी चीज इस पृथ्वी पर दी है वह मानव व जीवित पशु पक्षियों के रखरखाव के लिए उनके भले के लिए बनाई है चलिए मेरे वेट कबीर पॉडकास्ट को सुनने वालों सोच समझ कर बताओ कि आप जो वोट देते हैं उसका आपके जीवन में और समाज में क्या महत्व है क्या खासियत है खाने को बहुत कुछ है और मैं खाने से बाज भी नहीं आता आपका अपना वेद कबीरा
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