![Achchha Bolne Ki Kala Aur Kamyabi [The Art of Public Speaking]](https://pbcdn.aoneroom.com/image/2025/11/07/b953917528cadb60c082b9fe9e2e7758.jpg)
Achchha Bolne Ki Kala Aur Kamyabi [The Art of Public Speaking]
Michael
Description
प्रखर वक्ता होना, ओजस्वी वाणी का स्वामी होना, प्रभावी शैली में श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध कर देने की क्षमता जिसमें हो, वह सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक सफल होने की संभावना रखता है। बातचीत करना भाषण की कला सीखने का सबसे पहला सिद्धांत है। शुरुआती दौर में स्वर एवं अंदाज जैसी कलाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं होती है। बातचीत करना कला को सीखने का पहला सिद्धांत है; अर्थात् बोलिए, वाद-विवाद में हिस्सा लीजिए, अपनी प्रतिभा का स्वयं आकलन कीजिए और दर्शकों की आलोचना से सीखने की कोशिश कीजिए। सवाल है कि खुद की गलतियों को कैसे समझा जाए? इसके लिए कुछ तथ्यों को समझने की आवश्यकता है—महान् वक्ता में कौन से विशेष गुण होते हैं और उन गुणों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है? स्वयं के व्यक्तित्व में ऐसी कौन सी कमी है, जो इन गुणों की प्राप्ति में बाधा बन सकती है? इस विषय पर महान् लेखक डेल कारनेगी की सदाबहार एवं सर्वाधिक पसंद की जानेवाली इस पुस्तक के द्वारा कोई भी सामान्य व्यक्ति दर्शकों के समक्ष बोलने के क्षेत्र में कामयाबी के शिखर तक पहुँच सकता है।Please note: This audiobook is in Hindi.Read more
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Episodes (32)
भाग 1 - दर्शकों के समक्ष भरोसा हासिल करना
भाग 2 - एक जैसे ढंग की नीरसता
भाग 3 - प्रभाव एवं वशीभूतता द्वारा कुशलता
भाग 4 - स्वर बदलने की कुशलता
भाग 5 - गति में बदलाव की कुशलता
भाग 6 - विराम एवं ऊर्जा
भाग 7 - सुर बदलने की दक्षता
भाग 8 - भाषण शैली में एकग्रता
भाग 9 - बल
भाग 10 - भावना एवं जोश